You are currently viewing 4 स्तन कैंसर से बचाव : कारण और रिस्क फैक्टर के बारे में जानकारी
स्तन कैंसर से बचाव: स्तन कैंसर के कारण और रिस्क फैक्टर के बारे में इतनी जानकारी और जागरूकता के बाद निश्चित तौर पर बहुत से ऐसे रास्ते भी हैं जिनकी मदद से इससे बचना या इस बीमारी को टालना संभव हो सकता है।

4 स्तन कैंसर से बचाव : कारण और रिस्क फैक्टर के बारे में जानकारी

स्तन कैंसर से बचाव: स्तन कैंसर के कारण और रिस्क फैक्टर के बारे में इतनी जानकारी और जागरूकता के बाद निश्चित तौर पर बहुत से ऐसे रास्ते भी हैं जिनकी मदद से इससे बचना या इस बीमारी को टालना संभव हो सकता है।

स्तन कैंसर से बचाव

  • शराब के कम सेवन के साथ व्यायाम और स्वस्थ आहार से निश्चित रूप से कैंसर फैलने की आशंका को कम किया जा सकता है।
  • स्तन कैंसर के हाई रिस्क फैक्टर वाली महिलाओं टेमोक्सिफिन का इस्तेमाल किया जाता है।
  • मीनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में प्रयोग होने वाली दवा एविस्टा (रेलोक्सिफिन) का इस्तेमाल भी स्तन कैंसर से बचाव के लिए किया जाता है।
  • हाई रिस्क वाली महिलाओं में कैंसर के प्रसार को रोकने के लिए ऑपरेशन के जरिये स्तन हटा दिया जाता है (इसे प्रीवेंटिव मास्टेक्टोमी) कहा जाता है।

स्तन कैंसर

स्तन कैंसर वह कैंसर है जो स्तनों की कोशिकाओं में बनता है। आमतौर पर स्तन कैंसर महिलाओं होता है पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है की ये पुरुषो में नहीं होता। स्तन कैंसर के बहुत से मामले पुरुषो में भी देखने को मिले है पर ये महिलाओ के मुकाबले बहुत कम सँख्या है।

त्वचा कैंसर के बाद, स्तन कैंसर अमेरिका में महिलाओं में सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है। स्तन कैंसर पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकता है, लेकिन यह महिलाओं में कहीं अधिक सामान्य है।

स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान और अनुसंधान के लिए सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किये जा रहे है जिसकी वजह से स्तन कैंसर के निदान और उपचार में भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ  देशो ने प्रगति की है। अब इन प्रयाशो के फलस्वरूप स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में कमी आई है जिससे अब स्तन कैंसर में जीवित रहने की दर में वृद्धि हुई है, और इस बीमारी की वजह से भारत में होने वाली मौतों की संख्या में भी लगातार गिरावट आ रही है, जिसका मुख्य कारण स्तन कैंसर के बारे में पहले से पता लगाना और समय पर इलाज शुरू करवाना और इस बीमारी की बेहतर समझ जैसे कारक शामिल  हैं।

कब टेस्ट करवाये ?

सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि साधारण कंडिशन में स्तन कैसे दिखते और छूने से कैसे महसूस होते हैं। स्तन कैंसर का सबसे ज्यादा देखा जाने वाले लक्षण हैं ब्स्तन में लंप (गांठ बनाना) पड़ना। स्तन में सख्त मांस जैसा महसूस होना जिसे छूने पर दर्द न होता हो, यह भी ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण है। अगर आपको दर्द हो या जरा भी शक हो तो आप खुद भी घर पर इसे चेक करके किसी अच्छे ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर से मिल सकती हैं।

लक्षण

  • निप्पल्स का अंदर की ओर धंसना
  • ब्रेस्ट या निप्पल में दर्द
  • ब्रेस्ट में सूजन
  • ब्रेस्ट में निप्पल के पास या कहीं भी लंप होना।
  • आर्मपिट (बगल) में लंप होना।
  • ब्रेस्ट के साइज में बदलाव।
  • निप्पल्स से खून आना।
  • हड्डी में दर्द।
  • निप्पल से डिसचार्ज (ब्रेस्ट मिल्क नहीं)
  • ब्रेस्ट की स्किन या निप्पल में रेडनेस
  • निप्पल्स की थिकनेस में बदलाव।

कृप्या ध्यान दें, यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षण दिख रहे है तो आज ही किसी अच्छे ऑन्कोलॉजिस्ट से मिले और अपने जरुरी टेस्ट करवाए।

Read More Blogs – Click Here

Make An Appointment

Leave a Reply